किसको गांधी चाहिए, जब देश में लग गई होड़
बाज़ारवाद छ गया सभी पर सारे बन्धन तोड़
नेहरू गांधी की दूरदृष्टि को हो गया मोतियाबिंद
विश्व गुरु बनते बनते कहाँ आ गए गोविंद
हर पर्दा है तार तार , हर बंधन दिया है तोड़
किसको गांधी चाहिए………
secularism के धजे उड़ गए, समाजवाद भरे है पानी
हर ठेके पे मुहर लग गई अदानी और अंबानी
foreign हो या economy सारी पालिसी फेल
nri भी दुखी बड़ा है मची है धक्म पैल
नेहरू गांधी बात पुरानी, उनको दो अब छोड़
किसको गांधी चाहिए…….